भारत में यूरोपियों का आगमन: एक ऐतिहासिक और व्यापारिक सफर (Arrival of Europeans in India)
भारत, जिसे प्राचीन काल से ‘सोने की चिड़िया’ कहा जाता था, हमेशा से विदेशी व्यापारियों के आकर्षण का केंद्र रहा है। लेकिन 15वीं शताब्दी के अंत में समुद्र के रास्ते यूरोपियों का भारत में आगमन महज एक व्यापारिक घटना नहीं थी, बल्कि इसने भारत के भविष्य को पूरी तरह बदल दिया। मसालों के लालच में शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे राजनीतिक हस्तक्षेप और अंततः गुलामी की जंजीरों में तब्दील हो गया। 1498 में वास्को डी गामा द्वारा समुद्री मार्ग की खोज से लेकर अंग्रेजों के एकाधिकार तक का इतिहास रोमांचक भी है और सबक देने वाला भी।
इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि पुर्तगाली, डच, अंग्रेज, डेन और फ्रांसीसी भारत क्यों आए, उनके बीच की प्रतिस्पर्धा कैसी थी और कैसे एक व्यापारिक कंपनी ने भारत के विशाल साम्राज्य पर नियंत्रण प्राप्त किया।
विषय सूची (Table of Contents)
- यूरोपियों के आगमन की पृष्ठभूमि
- पुर्तगालियों का आगमन: पहले यूरोपीय यात्री
- डच ईस्ट इंडिया कंपनी: व्यापारिक प्रतिस्पर्धा
- अंग्रेजों का आगमन: व्यापार से शासन तक
- डेनिश और फ्रांसीसी कंपनियों का इतिहास
- यूरोपीय कंपनियों के बीच संघर्ष (कर्नाटक युद्ध)
- भारतीय अर्थव्यवस्था और समाज पर प्रभाव
- महत्वपूर्ण तथ्य (Important Facts)
- कंपनियों का आगमन क्रम (Chronology Table)
- अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
- निष्कर्ष
1. यूरोपियों के आगमन की पृष्ठभूमि
मध्यकाल में भारत और यूरोप के बीच व्यापारिक संबंध पुराने थे, लेकिन यह मार्ग मुख्य रूप से ज़मीनी रास्तों और फारस की खाड़ी से होकर गुजरता था। 1453 ईस्वी में जब तुर्कों ने कुस्तुनतुनिया (Constantinople) पर अधिकार कर लिया, तो पुराने मार्ग बंद हो गए।
- मसालों की मांग: यूरोप में मांस को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए काली मिर्च और अन्य मसालों की भारी आवश्यकता थी।
- समुद्री खोज: स्पेन और पुर्तगाल के शासकों ने नाविकों को नए समुद्री मार्ग खोजने के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की।
- वैज्ञानिक प्रगति: कुतुबनुमा (Compass) और उन्नत जहाजों के निर्माण ने लंबी समुद्री यात्राओं को संभव बनाया।
2. पुर्तगालियों का आगमन: पहले यूरोपीय यात्री
भारत आने वाले पहले यूरोपीय पुर्तगाली थे। उन्होंने ही भारत के लिए सीधे समुद्री मार्ग की खोज की।
वास्को डी गामा की यात्रा
17 मई 1498 को वास्को डी गामा भारत के पश्चिमी तट पर स्थित ‘कालीकट’ बंदरगाह पहुँचा। वहाँ के स्थानीय राजा जमोरिन ने उसका स्वागत किया। वास्को डी गामा की इस यात्रा ने यूरोप और भारत के बीच व्यापार के एक नए युग की शुरुआत की।
प्रमुख पुर्तगाली गवर्नर
- फ्रांसिस्को डी अल्मीडा: इसने ‘शांत जल की नीति’ (Blue Water Policy) अपनाई ताकि पुर्तगाली नौसेना को हिंद महासागर में सबसे शक्तिशाली बनाया जा सके।
- अल्फांसो डी अल्बुकर्क: इसे भारत में पुर्तगाली शक्ति का वास्तविक संस्थापक माना जाता है। इसने 1510 में बीजापुर से गोवा जीत लिया।
3. डच ईस्ट इंडिया कंपनी: व्यापारिक प्रतिस्पर्धा
1602 में हॉलैंड (अब नीदरलैंड) की ‘यूनाइटेड ईस्ट इंडिया कंपनी’ की स्थापना हुई।
- व्यापारिक केंद्र: डचों ने अपनी पहली फैक्ट्री 1605 में मसूलीपट्टनम में स्थापित की।
- मुख्य रुचि: वे मसालों से ज्यादा भारतीय सूती वस्त्रों (Textiles) के व्यापार में रुचि रखते थे।
- पतन: 1759 के बेदरा के युद्ध में अंग्रेजों ने डचों को हराकर उनकी भारतीय महत्वाकांक्षाओं को समाप्त कर दिया।
4. अंग्रेजों का आगमन: व्यापार से शासन तक
ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना 31 दिसंबर 1600 को हुई थी। इन्हें महारानी एलिजाबेथ प्रथम द्वारा पूर्वी देशों के साथ व्यापार का एकाधिकार मिला।
मुगल दरबार में अंग्रेज
1608 में कैप्टन हॉकिंस और 1615 में सर थॉमस रो मुगल सम्राट जहाँगीर के दरबार में आए। थॉमस रो ने भारत में व्यापारिक कोठियां खोलने का शाही फरमान प्राप्त करने में सफलता हासिल की।
मुख्य केंद्र और किलाबंदी
- मद्रास: यहाँ अंग्रेजों ने ‘फोर्ट सेंट जॉर्ज’ का निर्माण कराया।
- बम्बई: चार्ल्स द्वितीय को पुर्तगालियों से दहेज में बम्बई मिला, जिसे बाद में कंपनी को दे दिया गया।
- कलकत्ता: 1690 में जॉब चारनॉक ने यहाँ फैक्ट्री बनाई और ‘फोर्ट विलियम’ की नींव रखी।
5. डेनिश और फ्रांसीसी कंपनियों का इतिहास
डेनिश (Danish): ये 1616 में भारत आए। इनका प्रमुख केंद्र बंगाल का सेरामपुर था। वे भारत में पैर नहीं जमा पाए और अपनी फैक्ट्रियां अंग्रेजों को बेच दीं।
फ्रांसीसी (French): ‘कंपनी दे इंदे ओरिएंटल’ की स्थापना 1664 में हुई। फ्रांसीसियों ने अपनी पहली फैक्ट्री सूरत (1668) में खोली। इनका मुख्य ठिकाना पांडिचेरी था।
6. यूरोपीय कंपनियों के बीच संघर्ष (कर्नाटक युद्ध)
भारत में सर्वोच्चता स्थापित करने के लिए अंग्रेजों और फ्रांसीसियों के बीच तीन युद्ध हुए जिन्हें ‘कर्नाटक युद्ध’ कहा जाता है।
- डूप्ले: फ्रांसीसी गवर्नर डूप्ले ने भारतीय राजाओं के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप की नीति शुरू की।
- निर्णायक युद्ध: 1760 के वांडिवाश के युद्ध में अंग्रेजों ने फ्रांसीसियों को पूरी तरह परास्त कर दिया, जिससे अंग्रेजों का रास्ता साफ हो गया।
7. भारतीय अर्थव्यवस्था और समाज पर प्रभाव
यूरोपियों के आने से भारत में कई बड़े बदलाव हुए:
- कृषि: तंबाकू, आलू, मक्का और लाल मिर्च जैसी फसलें भारत में यूरोपियों द्वारा लाई गईं।
- तकनीक: पुर्तगालियों ने 1556 में गोवा में पहला प्रिंटिंग प्रेस स्थापित किया।
- नुकसान: भारत के पारंपरिक हस्तशिल्प उद्योग का पतन हुआ और भारी मात्रा में धन का निष्कासन (Drain of Wealth) यूरोप की ओर हुआ।
8. महत्वपूर्ण तथ्य (Important Facts)
- पुर्तगाली भारत आने वाले पहले और जाने वाले सबसे अंतिम यूरोपीय थे।
- वास्को डी गामा की सहायता करने वाले गुजराती नाविक का नाम अब्दुल मजीद था।
- अंग्रेजों को 1717 में मुगल सम्राट फर्रुखसियर ने ‘मैग्ना कार्टा’ (व्यापारिक छूट का पत्र) दिया था।
- मद्रास को पट्टे पर लेने वाला अंग्रेज अधिकारी फ्रांसिस डे था।
9. कंपनियों का आगमन क्रम (Chronology Table)
| क्रम | यूरोपीय शक्ति | आगमन वर्ष | पहली फैक्ट्री का स्थान |
|---|---|---|---|
| 1 | पुर्तगाली | 1498 | कोचीन (1503) |
| 2 | डच | 1602 | मसूलीपट्टनम (1605) |
| 3 | अंग्रेज | 1608 | सूरत (1613) |
| 4 | डेन्स | 1616 | त्रावणकोर (1620) |
| 5 | फ्रांसीसी | 1664 | सूरत (1668) |
10. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: भारत की खोज किसने की थी?
उत्तर: 1498 में पुर्तगाली नाविक वास्को डी गामा ने भारत के लिए समुद्री मार्ग की खोज की थी।
प्रश्न 2: अंग्रेजों ने अपनी पहली फैक्ट्री कहाँ खोली?
उत्तर: अंग्रेजों ने 1611 में मसूलीपट्टनम में अस्थायी और 1613 में सूरत में पहली स्थायी फैक्ट्री खोली।
प्रश्न 3: ‘ब्लू वाटर पॉलिसी’ का क्या अर्थ है?
उत्तर: यह पुर्तगाली गवर्नर फ्रांसिस्को डी अल्मीडा की नीति थी, जिसका उद्देश्य समुद्र पर वर्चस्व स्थापित करना था।
प्रश्न 4: बेदरा का युद्ध कब और किसके बीच हुआ?
उत्तर: यह युद्ध 1759 में अंग्रेजों और डचों के बीच हुआ, जिसमें डच हार गए।
प्रश्न 5: फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी का संस्थापक कौन था?
उत्तर: फ्रांसीसी कंपनी की स्थापना 1664 में लुई चौदहवें के मंत्री कोलबर्ट ने की थी।
प्रश्न 6: वांडिवाश का युद्ध क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर: इस युद्ध (1760) ने भारत में फ्रांसीसियों के शासन की संभावना को खत्म कर दिया और अंग्रेजों को सर्वोच्च बना दिया।
प्रश्न 7: पुर्तगाली गोवा को कब छोड़कर गए?
उत्तर: पुर्तगाली 1961 में ‘ऑपरेशन विजय’ के बाद गोवा छोड़कर गए।
प्रश्न 8: कौन सी यूरोपीय शक्ति मसालों के बजाय वस्त्रों पर अधिक ध्यान देती थी?
उत्तर: डच ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारतीय वस्त्रों के व्यापार को अधिक प्राथमिकता दी थी।
11. निष्कर्ष
भारत में यूरोपियों का आगमन व्यापारिक उद्देश्यों से प्रेरित था, लेकिन कालांतर में इसने साम्राज्यवादी रूप ले लिया। पुर्तगालियों द्वारा शुरू किए गए इस मार्ग ने अंग्रेजों के लिए भारत पर कब्जा करने का रास्ता आसान कर दिया। इस ऐतिहासिक कालखंड ने भारत की आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक संरचना को जड़ से हिला दिया। आज जब हम इस इतिहास को देखते हैं, तो यह हमें वैश्विक व्यापार और कूटनीति के गहरे सबक सिखाता है।
आशा है कि यह लेख आपके लिए जानकारीपूर्ण रहा होगा। यदि आप किसी विशेष यूरोपीय गवर्नर या युद्ध के बारे में अधिक विस्तार से जानना चाहते हैं, तो कृपया कमेंट में बताएं!
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