सिंधु घाटी सभ्यता (Indus Valley Civilization): विश्व की सबसे प्राचीन और विकसित नगरीय सभ्यता
प्रस्तावना: सिंधु घाटी सभ्यता (Indus Valley Civilization), जिसे ‘हड़प्पा सभ्यता’ के नाम से भी जाना जाता है, प्राचीन विश्व की चार प्रमुख सभ्यताओं में से एक थी। यह सभ्यता लगभग 2500 ई.पू. से 1750 ई.पू. के दौरान दक्षिण एशिया के उत्तर-पश्चिमी भाग में विकसित हुई। इसकी खोज 1921 में रायबहादुर दयाराम साहनी द्वारा हड़प्पा नामक स्थल के उत्खनन से हुई थी। यह एक कांस्य युगीन (Bronze Age) सभ्यता थी जो अपनी उत्कृष्ट नगर नियोजन, उन्नत जल निकासी प्रणाली और वैश्विक व्यापारिक कौशल के लिए जानी जाती है। सिंधु और उसकी सहायक नदियों के किनारे विकसित होने के कारण इसे ‘सिंधु घाटी सभ्यता’ कहा गया।
सिंधु घाटी सभ्यता का कालक्रम और विस्तार
इतिहासकारों ने रेडियो कार्बन (C-14) डेटिंग के आधार पर इस सभ्यता के विकास को तीन चरणों में विभाजित किया है:
- प्रारंभिक हड़प्पा काल: 3300 ई.पू. से 2600 ई.पू.
- परिपक्व हड़प्पा काल: 2600 ई.पू. से 1900 ई.पू. (यही सभ्यता का स्वर्ण युग था)
- उत्तर हड़प्पा काल: 1900 ई.पू. से 1300 ई.पू.
इसका भौगोलिक विस्तार उत्तर में मांडा (जम्मू) से लेकर दक्षिण में दैमाबाद (महाराष्ट्र) तक और पश्चिम में सुत्कागेंडोर (बलूचिस्तान) से पूर्व में आलमगीरपुर (उत्तर प्रदेश) तक था।
सिंधु घाटी सभ्यता की मुख्य विशेषताएँ
सिंधु घाटी सभ्यता को उसकी अद्भुत नगर नियोजन और वैज्ञानिक सोच के कारण ‘नगरीय क्रांति’ माना जाता है।
1. उत्कृष्ट नगर नियोजन (Town Planning)
नगर दो मुख्य भागों में विभाजित थे:
- पश्चिमी टीला (दुर्ग): यहाँ ऊँचे चबूतरे पर महत्वपूर्ण प्रशासनिक और धार्मिक भवन स्थित थे।
- पूर्वी टीला (निचला शहर): यहाँ सामान्य नागरिक, व्यापारी और शिल्पकार निवास करते थे।
सड़कें एक-दूसरे को समकोण (90 डिग्री) पर काटती थीं, जिसे ‘ग्रिड पद्धति’ कहा जाता है।
2. उन्नत जल निकासी प्रणाली
हड़प्पा वासियों की स्वच्छता प्रणाली आज के आधुनिक शहरों जैसी थी। प्रत्येक घर की नाली गली की बड़ी नाली से जुड़ी थी, जो ढकी हुई होती थी। नालियों की सफाई के लिए जगह-जगह ‘मैनहोल’ (सफाई कुंड) बनाए गए थे।
सामाजिक और आर्थिक जीवन
सामाजिक संरचना
- मातृसत्तात्मक समाज: खुदाई में मिली नारी मूर्तियों से पता चलता है कि समाज में महिलाओं का स्थान उच्च था।
- वर्ग विभाजन: समाज विद्वान, योद्धा, व्यापारी और श्रमिक चार वर्गों में बंटा हुआ था।
- वेशभूषा: ये लोग सूती और ऊनी कपड़ों का उपयोग करते थे। स्त्री और पुरुष दोनों आभूषणों के शौकीन थे।
आर्थिक गतिविधियाँ
- कृषि: गेहूँ, जौ, राई, और मटर मुख्य फसलें थीं। कपास (Sindon) का उत्पादन शुरू करने का श्रेय इसी सभ्यता को जाता है।
- व्यापार: लोथल एक प्रमुख बंदरगाह था। यहाँ के लोग मेसोपोटामिया और फारस के साथ समुद्री व्यापार करते थे।
प्रमुख स्थल और उनकी खोज
| स्थल | खोजकर्ता (वर्ष) | महत्वपूर्ण साक्ष्य |
|---|---|---|
| हड़प्पा | दयाराम साहनी (1921) | अन्नागार, आर-37 कब्रिस्तान |
| मोहनजोदड़ो | राखालदास बनर्जी (1922) | विशाल स्नानागार, नर्तकी की कांस्य मूर्ति |
| लोथल | एस. आर. राव (1954) | बंदरगाह (Dockyard), चावल के साक्ष्य |
| कालीबंगन | बी.बी. लाल (1961) | जुते हुए खेत, काली चूड़ियाँ |
शैक्षणिक उदाहरण (Educational Example)
उदाहरण: सिंधु घाटी सभ्यता की नगर योजना को समझने के लिए आप आज के ‘चंडीगढ़’ या ‘न्यूयार्क’ जैसे नियोजित शहरों को देख सकते हैं। जिस प्रकार इन शहरों में सेक्टर बने होते हैं और सड़कें समकोण पर काटती हैं, ठीक वैसी ही व्यवस्था 4500 साल पहले मोहनजोदड़ो में थी। यह दर्शाता है कि उस समय के इंजीनियर गणित और ज्यामिति के प्रकांड विद्वान थे।
सिंधु घाटी सभ्यता का पतन
इस महान सभ्यता के पतन के कारणों पर इतिहासकारों के अलग-अलग मत हैं:
- बाढ़: नदियों में आने वाली भीषण बाढ़ को सबसे प्रमुख कारण माना जाता है।
- जलवायु परिवर्तन: वर्षा की कमी और घग्गर नदी के सूखने से कृषि नष्ट हो गई।
- बाह्य आक्रमण: कुछ विद्वान आर्यों के आक्रमण को पतन का कारण मानते हैं।
निष्कर्ष
सिंधु घाटी सभ्यता (Indus Valley Civilization) भारतीय इतिहास की नींव है। इसकी वैज्ञानिक सोच, शहरी व्यवस्था और व्यापारिक कौशल आज भी शोध का विषय हैं। हालांकि इसकी लिपि अभी तक पढ़ी नहीं जा सकी है, लेकिन खुदाई में मिले अवशेष चीख-चीखकर इसकी महानता की कहानी बयां करते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: सिंधु सभ्यता का सबसे बड़ा स्थल कौन सा है?
उत्तर: राखीगढ़ी (हरियाणा) को सिंधु घाटी सभ्यता का सबसे बड़ा भारतीय स्थल माना जाता है।
प्रश्न 2: क्या हड़प्पा के लोग लोहे का उपयोग करते थे?
उत्तर: नहीं, सिंधु घाटी सभ्यता के लोग लोहे (Iron) से परिचित नहीं थे। वे मुख्य रूप से तांबे और कांसे का उपयोग करते थे।
प्रश्न 3: ‘मृतकों का टीला’ किसे कहा जाता है?
उत्तर: सिंधी भाषा में ‘मोहनजोदड़ो’ का अर्थ ‘मृतकों का टीला’ (Mound of the Dead) होता है।
प्रश्न 4: सिंधु घाटी की लिपि कैसी थी?
उत्तर: इनकी लिपि ‘भाव-चित्रात्मक’ थी, जिसे अभी तक पढ़ा नहीं जा सका है।
प्रश्न 5: सिंधु वासी किसकी पूजा करते थे?
उत्तर: वे मुख्य रूप से पशुपति शिव, मातृदेवी, पीपल के वृक्ष और सांड की पूजा करते थे।
Leave a Reply