जैन धर्म और बौद्ध धर्म: प्राचीन भारत की महान आध्यात्मिक क्रांति
प्रस्तावना: छठी शताब्दी ईसा पूर्व का समय भारतीय इतिहास में एक वैचारिक और धार्मिक संक्रांति का काल था। इस दौरान उत्तर भारत के गंगा के मैदानी क्षेत्रों में जैन धर्म और बौद्ध धर्म का उदय हुआ, जिसने तत्कालीन वैदिक कर्मकांडों और वर्ण व्यवस्था की जटिलताओं को चुनौती दी। जहाँ एक ओर महावीर स्वामी ने जैन धर्म को नई ऊंचाइयों पर पहुँचाया, वहीं दूसरी ओर गौतम बुद्ध ने ‘मध्यम मार्ग’ के जरिए दुनिया को शांति का संदेश दिया।
ये दोनों धर्म न केवल धार्मिक आंदोलन थे, बल्कि सामाजिक समानता और अहिंसा के ध्वजवाहक भी थे। इन्होंने संस्कृत के बजाय जनसाधारण की भाषा (प्राकृत और पाली) में उपदेश देकर ज्ञान के द्वार सभी के लिए खोल दिए। आज के इस विस्तृत लेख में हम इन दोनों धर्मों की उत्पत्ति, उनकी शिक्षाओं और समाज पर उनके प्रभाव का विश्लेषण करेंगे।
1. धार्मिक सुधार आंदोलनों के उदय के कारण
प्राचीन भारत में इन नए धर्मों के उदय के पीछे कई सामाजिक और आर्थिक कारण जिम्मेदार थे:
- वैदिक कर्मकांड: उत्तर वैदिक काल में यज्ञ और अनुष्ठान अत्यंत जटिल और खर्चीले हो गए थे।
- वर्ण व्यवस्था: समाज में जातिगत भेदभाव चरम पर था, जिससे वैश्य और शूद्र वर्ग में असंतोष था।
- लोहे का प्रयोग: कृषि के विस्तार से वैश्य वर्ग समृद्ध हुआ और वे बेहतर सामाजिक स्थिति की चाह रखने लगे।
- अहिंसा की आवश्यकता: कृषि प्रधान समाज में पशुओं की बलि के विरुद्ध एक नई विचारधारा की जरूरत थी।
2. जैन धर्म: इतिहास और शिक्षाएं
जैन धर्म अत्यंत प्राचीन है, जिसमें 24 तीर्थंकर हुए हैं। वर्धमान महावीर इसके 24वें और अंतिम तीर्थंकर थे।
प्रमुख सिद्धांत:
- त्रिरत्न: सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र।
- पंच महाव्रत: अहिंसा, सत्य, अस्तेय (चोरी न करना), अपरिग्रह (संपत्ति न रखना) और ब्रह्मचर्य।
- अनेकांतवाद: यह सिद्धांत मानता है कि सत्य के कई पहलू होते हैं।
3. बौद्ध धर्म: इतिहास और शिक्षाएं
गौतम बुद्ध ने सांसारिक दुखों से मुक्ति पाने के लिए बौद्ध धर्म की स्थापना की और ‘मध्यम मार्ग’ का उपदेश दिया।
प्रमुख सिद्धांत:
- चार आर्य सत्य: दुख, दुख का कारण, दुख का निरोध और दुख निरोध का मार्ग।
- अष्टांगिक मार्ग: सम्यक दृष्टि, सम्यक संकल्प, सम्यक वाणी, सम्यक कर्मांत, सम्यक आजीव, सम्यक व्यायाम, सम्यक स्मृति और सम्यक समाधि।
- निर्वाण: लालसाओं का त्याग और परम शांति की प्राप्ति।
4. जैन और बौद्ध धर्म के बीच प्रमुख समानताएं
दोनों धर्मों में कई बिंदु समान थे जो उस समय की क्रांतिकारी सोच को दर्शाते थे:
- अनीश्वरवाद: दोनों ने वेदों की सर्वोच्चता और सृजनकर्ता के रूप में ईश्वर को नकार दिया।
- अहिंसा: दोनों धर्मों ने जीव हत्या का कड़ा विरोध किया।
- समानता: दोनों ने वर्ण व्यवस्था की बुराइयों को दूर करने और सभी जातियों को संघ में शामिल करने पर बल दिया।
- कर्म और पुनर्जन्म: दोनों ही कर्मों के फल और पुनर्जन्म के चक्र में विश्वास रखते थे।
5. जैन धर्म और बौद्ध धर्म में मुख्य अंतर
| विशेषता | जैन धर्म | बौद्ध धर्म |
|---|---|---|
| अहिंसा | अत्यधिक कठोर (खेती करना भी वर्जित था) | व्यावहारिक और मध्यम मार्ग |
| मुक्ति का मार्ग | कठोर तपस्या और कायाक्लेश | अष्टांगिक मार्ग (मध्यम मार्ग) |
| आत्मा | आत्मा के अस्तित्व को मानता है | अनात्मवाद (स्थायी आत्मा को नहीं मानता) |
| विस्तार | मुख्यतः भारत तक सीमित रहा | विश्व के कई देशों में फैला |
महत्वपूर्ण तथ्य (Important Facts)
- बुद्ध का प्रथम उपदेश: सारनाथ (धर्मचक्रप्रवर्तन)।
- महावीर का जन्म: वैशाली के निकट कुंडग्राम में।
- श्वेतांबर और दिगंबर: जैन धर्म के दो प्रमुख संप्रदाय।
- हीनयान और महायान: बौद्ध धर्म के प्रमुख संप्रदाय।
- त्रिपिटक: बौद्ध धर्म के पवित्र ग्रंथ (सुत्त, विनय और अभिधम्म)।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. बौद्ध धर्म का ‘मध्यम मार्ग’ क्या है?
उत्तर: यह विलासिता और कठोर तपस्या के बीच का रास्ता है, जो मानसिक शांति और निर्वाण की ओर ले जाता है।
2. जैन धर्म में तीर्थंकर का क्या अर्थ है?
उत्तर: तीर्थंकर वे महान गुरु होते हैं जिन्होंने ज्ञान प्राप्त किया और दूसरों को संसार रूपी सागर से पार होने का मार्ग दिखाया।
3. बुद्ध ने किस भाषा में उपदेश दिए?
उत्तर: गौतम बुद्ध ने अपने उपदेश जनसाधारण की भाषा ‘पाली’ में दिए थे।
4. जैन धर्म के ‘त्रिरत्न’ क्या हैं?
उत्तर: सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र।
5. बौद्ध धर्म भारत से क्यों कम हो गया?
उत्तर: बाहरी आक्रमणों, संघों में भ्रष्टाचार और हिंदू धर्म में आए सुधारों के कारण समय के साथ इसका प्रभाव भारत में कम हो गया।
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