वैदिक काल (Vedic Period) का संपूर्ण इतिहास: एक गौरवशाली युग की विस्तृत जानकारी
प्रस्तावना: भारतीय इतिहास के पन्नों में वैदिक काल (Vedic Period) वह स्वर्ण युग है, जिसने न केवल भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक नींव रखी, बल्कि आज के आधुनिक समाज को भी नैतिक और दार्शनिक मूल्य प्रदान किए। सिंधु घाटी सभ्यता के पतन के बाद जिस नई सभ्यता का उदय हुआ, उसे ‘वैदिक सभ्यता’ के नाम से जाना जाता है। इस काल की जानकारी का मुख्य स्रोत ‘वेद’ हैं, जो हिंदू धर्म के सबसे प्राचीन और पवित्र ग्रंथ माने जाते हैं।
वैदिक काल का समय लगभग 1500 ई.पू. से 600 ई.पू. तक माना जाता है। इसे दो मुख्य भागों—ऋग्वैदिक काल और उत्तर वैदिक काल में विभाजित किया गया है। यह वह समय था जब महान संतों ने मंत्रों का उच्चारण किया, यज्ञों की परंपरा शुरू हुई और वर्ण व्यवस्था ने आकार लेना शुरू किया।
वैदिक सभ्यता का वर्गीकरण
इतिहासकारों ने साक्ष्यों और सामाजिक परिवर्तनों के आधार पर इस काल को दो भागों में बाँटा है:
- ऋग्वैदिक काल (Early Vedic Period): 1500 ई.पू. से 1000 ई.पू.। इस काल का मुख्य आधार ऋग्वेद है।
- उत्तर वैदिक काल (Later Vedic Period): 1000 ई.पू. से 600 ई.पू.। इस काल में लोहे का व्यापक उपयोग शुरू हुआ और अन्य तीन वेदों की रचना हुई।
1. ऋग्वैदिक काल (Early Vedic Period)
यह वैदिक सभ्यता का प्रारंभिक चरण था। इस समय का जीवन सरल, ग्रामीण और कबीलाई था।
मुख्य विशेषताएँ:
- आवास: आर्य मुख्य रूप से ‘सप्त सैंधव’ प्रदेश (सात नदियों की भूमि) में बसे थे।
- पशुपालन: समाज का मुख्य आधार पशुपालन था। गाय को ‘अघन्या’ (न मारने योग्य) माना जाता था।
- स्वतंत्र समाज: महिलाओं को शिक्षा और सभाओं में भाग लेने का पूर्ण अधिकार था।
2. उत्तर वैदिक काल (Later Vedic Period)
1000 ई.पू. के आसपास लोहे की खोज ने इस काल में सामाजिक और राजनीतिक क्रांति ला दी।
प्रमुख परिवर्तन:
- क्षेत्रीय विस्तार: आर्य पंजाब से आगे बढ़कर गंगा-यमुना दोआब और बिहार तक फैल गए।
- कृषि प्रधान समाज: लोहे के औजारों के कारण खेती मुख्य व्यवसाय बन गई।
- जटिल वर्ण व्यवस्था: समाज ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र जैसे वर्णों में जन्म के आधार पर विभाजित होने लगा।
चारों वेदों का परिचय और महत्व
वेद भारतीय संस्कृति की आत्मा हैं। इन्हें ‘श्रुति’ भी कहा जाता है क्योंकि इन्हें सुनकर सुरक्षित रखा गया था।
ऋग्वेद (Rigveda)
यह विश्व का सबसे प्राचीन ग्रंथ है। इसमें 10 मंडल और 1028 सूक्त हैं। गायत्री मंत्र का उल्लेख इसी में मिलता है।
सामवेद (Samaveda)
इसे भारतीय संगीत का जनक कहा जाता है। इसमें यज्ञों के दौरान गाए जाने वाले गीतों का संग्रह है।
यजुर्वेद (Yajurveda)
यह गद्य और पद्य दोनों में है और यज्ञों की विधियों का वर्णन करता है।
अथर्ववेद (Atharvaveda)
इसमें औषधि, जादू-टोना, विवाह और दैनिक जीवन के रीति-रिवाजों का वर्णन मिलता है।
राजनीतिक और सामाजिक संरचना
वैदिक राजनीति कबीलाई लोकतांत्रिक व्यवस्था से शुरू होकर राजतंत्र की ओर बढ़ी।
- कुल: समाज की सबसे छोटी इकाई परिवार (कुल) थी।
- सभा और समिति: ये संस्थाएं राजा पर नियंत्रण रखती थीं।
- महिलाओं का स्थान: ऋग्वैदिक काल में महिलाएं उच्च शिक्षित थीं, लेकिन उत्तर वैदिक काल में उनकी स्थिति में कुछ गिरावट आई।
ऋग्वैदिक और उत्तर वैदिक काल में मुख्य अंतर
| विशेषता | ऋग्वैदिक काल | उत्तर वैदिक काल |
|---|---|---|
| मुख्य व्यवसाय | पशुपालन | कृषि |
| प्रमुख देवता | इंद्र, अग्नि, वरुण | प्रजापति, विष्णु, रुद्र |
| धातु का ज्ञान | तांबा, कांसा | लोहा (श्याम अयस) |
वैदिक काल के महत्वपूर्ण तथ्य (Important Facts)
- सत्यमेव जयते: यह आदर्श वाक्य ‘मुण्डकोपनिषद’ से लिया गया है।
- दशराज्ञ युद्ध: राजा सुदास और 10 राजाओं के बीच रावी नदी के तट पर हुआ युद्ध।
- शिक्षा: मौखिक शिक्षा प्रणाली प्रचलित थी जहाँ वेदों का रटन किया जाता था।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
1. वेदों की रचना किसने की?
वेदों को ‘अपौरुषेय’ माना जाता है, जिसका अर्थ है कि इनकी रचना किसी मनुष्य ने नहीं बल्कि ईश्वरीय ज्ञान के रूप में ऋषियों को प्राप्त हुई।
2. ‘अघन्या’ शब्द का क्या अर्थ है?
वैदिक काल में गाय को ‘अघन्या’ कहा गया है, जिसका अर्थ है ‘जिसका वध न किया जा सके’।
3. वर्ण व्यवस्था कब कठोर हुई?
वर्ण व्यवस्था उत्तर वैदिक काल में जन्म के आधार पर कठोर और वंशानुगत हो गई थी।
4. किस वेद को संगीत का मूल कहा जाता है?
सामवेद को भारतीय संगीत का मूल माना जाता है।
5. सभा और समिति में क्या अंतर था?
सभा समाज के बुजुर्गों और प्रतिष्ठित लोगों की संस्था थी, जबकि समिति सामान्य जनता की प्रतिनिधि सभा थी।
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